संस्कृत विभाग
महाविद्यालय में संस्कृत विभाग की स्थापना सत्र 1959 में हुई। अपनी स्थापना के बाद से विभाग संस्कृत भाषा के अध्ययन को लोकप्रिय बनाने में लगा हुआ है। संस्कृत को प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्रों के लिए स्नातक स्तर पर दूसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाता है। विभाग का मुख्य ध्यान स्नातक स्तर पर शिक्षा प्रदान करना है। प्रारम्भ में संस्कृत विषय को केवल ऐच्छिक विषय के रूप में पढ़ाया जाता था, लेकिन आधुनिक शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत इस विषय को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाने लगा।अनिवार्य विषय के परिणाम स्वरुप वर्तमान में इस विषय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने लगी, जिससे विद्यार्थियों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है
वर्तमान में संस्कृत विभाग में 487 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
कार्यक्रम विशिष्ट परिणाम
संस्कृत पाठ्यक्रम के द्वारा अधीत विद्यार्थी संस्कृत भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में दक्षता प्राप्त कर लेता है। पाठ्यक्रम में निर्धारित ग्रंथों के अध्ययन से मानवीय जीवन मूल्यों को ध्यानगम करते हुए एक श्रेष्ट नागरिक बनने की प्रेरणा प्राप्त होती है। संस्कृत साहित्य के अध्ययन से असीम अलौकिक आनंद की प्राप्ति एवं उनके द्वारा वर्णित विषयों के अध्ययन से ज्ञान नेत्रों का उन्मीलन गद्य एवं पद्य द्वारा सम्भव है।
दृष्टि
- संस्कृत विभाग का लक्ष्य विश्व की धरोहर संस्कृत भाषा और इस भाषा में उपलब्ध ज्ञान- विज्ञान के असीम भंडार को संरक्षित करना।
- इस भाषा के गौरव ,उदात मूल्यों को विद्यार्थियों में सस्थापित करना ।
- छात्रों को समाज में दूसरों की भलाई के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित करना।
उदेश्य
- संस्कृत विभाग का उदेश्य संस्कृत में ज्ञान के प्रसार को बढ़ाना और सुधारना, संस्कृत अध्ययन में ज्ञान के क्षेत्र में नए रास्ते तलाशना , सामजिक मूल्यों के दार्शनिक विचारों के संवर्धन में समाज हित में ध्यान केंद्रित करना है।
- अंध विश्वास , नशा , कन्या भ्रूण हत्या, दहेज़ प्रथा आदि कुरीतियों का मुकाबला कर के वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना ।